डीग।22/09/2026,ग्यानेन्द्र सिंह (जिला सवांददाता)
श्रीमद् भागवत कथा यज्ञ का श्रवण करने से जन्म जन्मांतर के विकार नष्ट हो जाते हैं। प्राणी मात्र का लौकिक व आध्यात्मिक विकास होता है। जहां अन्य युगों में धर्म लाभ एवं मोक्ष प्राप्ति के लिए कड़े प्रयास करने पड़ते हैं, कलियुग में कथा सुनने मात्र से व्यक्ति भवसागर से पार हो जाता है। यह शब्द खण्डेलवाल धर्मशाला में आयोजित हो रही श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के छठवें दिन व्यास पीठ पर विराजमान पूज्य भागवताचार्य पंडित मुरारी लाल पाराशर ने कहे।
कथा के दौरान पाराशर ने रुक्मणी विवाह, उद्धव चरित्र,कंस मर्दन, महारास आदि कथाओं का प्रसंग सुनाते हुए कहा कि कथा कल्पवृक्ष के समान है, जिससे सभी इच्छाओं की पूर्ति की जा सकती है।
पाराशर ने उद्धव चरित्र की कथा का वर्णन करते हुए कहा कि हमें अहंकार त्यागने, ज्ञान से अधिक प्रेम और शुद्ध भक्ति के महत्व को समझने की प्रेरणा देती है। इसके माध्यम से हमें यह सीख मिलती है कि ईश्वर को केवल शुष्क ज्ञान या तर्क से नहीं, बल्कि एक सच्चे और समर्पित हृदय से ही पाया जा सकता है।उद्धव जी की शिक्षाएँ भक्तों को धैर्य, समर्पण और प्रेम के साथ अपने कर्तव्यों का पालन करने की प्रेरणा देती हैं।इस अवसर पर श्री मति कांति देवी,संजय खण्डेलवाल उर्फ बंटी,महेश खण्डेलवाल,आदित्य खण्डेलवाल,निखिल खण्डेलवाल,पार्थ खण्डेलवाल,बाबू लाल,भगवान ,मुकेश,विष्णु,लखन,आशा खण्डेलवाल,सलोनी खण्डेलवाल,राजू खण्डेलवाल,ममता खण्डेलवाल, घनश्याम खंडेलवाल, जुगला खंडेलवाल, लक्ष्मी खण्डेलवाल सहित बड़ी संख्या में भक्त उपस्थित थे।
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